भारतीय मुसलमानों की राजनीतिक समझ
मुसलमानों का राजनीतिक मुस्तकबिल सेक्युलरिज्म और कम्युनलिज्म का खेल सिर्फ बीजेपी नहीं खेल रही है. ये खेल सेक्युलर कहे जाने वाले दल भी खेल रहे हैं क्योंकि इसकी वजह से उन्हें एकमुश्त मुसलमान वोट मिल जाते हैं. मुसलमान वोट भारत में सेक्युलर राजनीति की धुरी बन गया है. ये भारतीय राजनीति की एक बड़ी समस्या है. ये धुरी बीजेपी को हरा पाने या रोक पाने में बेअसर साबित हुई है. एकमुश्त मुसलमान वोट हासिल कर लेना बेशक बीजेपी को हरा पाने की गारंटी नहीं है. लेकिन इस बूते किसी पार्टी की राजनीति चलती रह सकती है. इस राजनीतिक समीकरण ने सेक्युलर दuलों को आलसी भी बना दिया है. न तो वे मुसलमानों के लिए विकास की कोई उम्मीद जगा पा रहा हैं और न ही अपने वोटर्स का दायरा बढ़ाने की ही कोशिश कर रहे हैं. इस एक बात ने भारतीय लोकतंत्र का भी सुर-ताल बिगाड़ दिया है. यह बात निर्विवाद है कि भारत के 14.2 प्रतिशत मुसलमान अपने दम पर बीजेपी को सत्ता में आने से रोक नहीं सकते. भारत में मुसलमान आबादी बिखरी हुई है और लोकसभा की सिर्फ 15 सीटें ऐसी हैं, जहां मुसलमान वोटर 50 प्रतिशत से ज्यादा है. यानी ये 15 सीटे ही ऐसी ह...